अब तो करलो बुद्धि मित्र ठिकाने पर
मुंबई तक रखी हैं आज निशाने पर
200 निर्दोषों को खोकर खामोशी
कब टूटेगी सिंघासन की बेहोशी.
कायरता बर्दास्त करेंगे हम कब तक
आखिर यूँ ही रोज मरेंगे हम कब तक
केवल ये ही निर्णय आज सही होगा
कोई 'शिखंडी' सत्ताधीश नहीं होगा.
...अंधे लालच का सिन्धु भर के चित में
ध्रतराष्ट्र हैं मौन स्वयं सुत के हित में
वरना वो ख़ूनी पंजे तुड़वा देते
अब तक अफजल पर कुत्ते छुड़वा देते.
बेशक सरे भारत का सर झुक जाये
उनकी कोशिश हैं ये फाँसी रुक जाये
निर्णय लेना होगा अब सरकारों को
पहले फाँसी होगी इन गद्दारों को
मंगलवार, 22 सितंबर 2009
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